Top 10 Swarm Drones: आधुनिक युद्ध में ड्रोन तकनीक तेजी से महत्वपूर्ण होती जा रही है। अब केवल एक ड्रोन से निगरानी या हमला करने के बजाय, कई ड्रोन को एक साथ समन्वित तरीके से संचालित करने की तकनीक पर भी काम हो रहा है। इसे स्वार्म ड्रोन टेक्नोलॉजी (Swarm Drone Technology) कहा जाता है।
भारत सहित अमेरिका, चीन, तुर्की और यूक्रेन जैसे देश इस क्षेत्र में अलग-अलग तकनीकों और प्रणालियों पर काम कर रहे हैं। भारत में Sheshnaag-150 जैसे स्वार्म स्ट्राइक ड्रोन प्रोजेक्ट, स्वायत्त FPV ड्रोन और ड्रोन-रोधी प्रणालियां रक्षा तकनीक की चर्चा में शामिल हैं।
इस लेख में हम भारत और दुनिया के प्रमुख स्वार्म ड्रोन सिस्टम, उनकी विशेषताओं, संभावित उपयोगों और उनसे निपटने वाली तकनीकों के बारे में जानेंगे।
स्वार्म ड्रोन क्या हैं और कैसे काम करते हैं?
स्वार्म ड्रोन ऐसे कई मानव रहित हवाई वाहनों (UAVs) का समूह होते हैं, जो किसी साझा मिशन के लिए एक-दूसरे के साथ या किसी केंद्रीय नियंत्रण प्रणाली के माध्यम से समन्वय कर सकते हैं।
सामान्य ड्रोन को अक्सर एक ऑपरेटर नियंत्रित करता है। इसके विपरीत, स्वार्म प्रणाली का उद्देश्य कई ड्रोन के बीच काम का बंटवारा, सामूहिक निगरानी और समन्वित गतिविधियां संभव बनाना है। हालांकि, हर स्वार्म सिस्टम पूरी तरह स्वायत्त नहीं होता। कुछ में मानव ऑपरेटर की लगातार निगरानी आवश्यक होती है।
स्वार्म ड्रोन की प्रमुख विशेषताएं
- समन्वित संचालन: कई ड्रोन एक साझा मिशन के लिए मिलकर काम कर सकते हैं।
- स्वायत्त नेविगेशन: कुछ सिस्टम निर्धारित निर्देशों के आधार पर अपना रास्ता चुन सकते हैं।
- सामूहिक निगरानी: कई क्षेत्रों से एक साथ जानकारी एकत्र की जा सकती है।
- लचीला संचालन: मिशन के अनुसार अलग-अलग ड्रोन को अलग-अलग कार्य सौंपे जा सकते हैं।
- AI और सेंसर तकनीक: कुछ प्रणालियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, कैमरे और अन्य सेंसर का उपयोग किया जाता है।
स्वार्म ड्रोन और सामान्य ड्रोन में अंतर
सामान्य ड्रोन किसी एक ऑपरेटर या निर्धारित मिशन के निर्देशों के अनुसार काम कर सकता है। स्वार्म ड्रोन प्रणाली में कई ड्रोन के बीच समन्वय इसका प्रमुख अंतर है।
हालांकि, केवल कई ड्रोन को एक साथ उड़ाने से कोई प्रणाली स्वार्म नहीं बन जाती। उनके बीच समन्वय, संचार और साझा मिशन की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है।
भारत के प्रमुख स्वार्म ड्रोन प्रोजेक्ट
भारत में सैन्य ड्रोन तकनीक को विकसित करने के लिए सरकारी संस्थानों, रक्षा कंपनियों और स्टार्टअप्स की भागीदारी महत्वपूर्ण है। कुछ परियोजनाएं स्वार्म संचालन पर केंद्रित हैं, जबकि कुछ स्वायत्त उड़ान, निगरानी या स्ट्राइक क्षमता से संबंधित हैं।
1. Sheshnaag-150: स्वार्म स्ट्राइक ड्रोन प्रोजेक्ट
Sheshnaag-150 को भारतीय रक्षा तकनीक से जुड़ी एक स्वार्म स्ट्राइक ड्रोन परियोजना के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। इस तरह की प्रणालियों का उद्देश्य लंबी दूरी के मिशनों में ड्रोन के समन्वित संचालन की क्षमता विकसित करना है।
स्वार्म स्ट्राइक ड्रोन में एक से अधिक मानव रहित विमान साझा मिशन के लिए काम कर सकते हैं। इससे निगरानी, मिशन समन्वय और अलग-अलग लक्ष्यों से संबंधित कार्यों में लचीलापन मिल सकता है।
हालांकि, Sheshnaag-150 की सटीक रेंज, उत्पादन की स्थिति, परीक्षणों और परिचालन क्षमता से जुड़े दावों को प्रकाशित करने से पहले आधिकारिक या विश्वसनीय रक्षा स्रोतों से सत्यापित करना जरूरी है।
2. भारतीय सेना के Autonomous FPV Swarm Drones
FPV का पूरा नाम First-Person View है। ऐसे ड्रोन में ऑपरेटर कैमरे से मिलने वाली लाइव तस्वीरों के आधार पर उड़ान को नियंत्रित कर सकता है।
स्वायत्त FPV स्वार्म परियोजनाओं का उद्देश्य कई ड्रोन के बीच समन्वय और कुछ कार्यों को स्वचालित करने की क्षमता विकसित करना है। सैन्य संदर्भ में इनका संभावित उपयोग निगरानी, टोही और अन्य मिशनों में हो सकता है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि FPV ड्रोन, स्वायत्त ड्रोन और स्वार्म ड्रोन एक-दूसरे से संबंधित होने के बावजूद अलग-अलग अवधारणाएं हैं। किसी परियोजना को पूरी तरह स्वायत्त स्वार्म सिस्टम तभी कहना चाहिए, जब उसकी संबंधित क्षमता की पुष्टि हो।
3. भारतीय सेना के लिए खरीदे गए स्वार्म ड्रोन
भारत में रक्षा क्षेत्र के लिए स्वदेशी ड्रोन और स्वार्म तकनीक विकसित करने में निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स की भूमिका बढ़ी है। विभिन्न प्रकार के ड्रोन निगरानी, टोही, प्रशिक्षण और अन्य सैन्य आवश्यकताओं के लिए विकसित किए जाते हैं।
लेकिन किसी ड्रोन की खरीद, परीक्षण, प्रदर्शन और वास्तविक परिचालन तैनाती अलग-अलग स्थितियां हैं। इसलिए भारतीय सेना द्वारा खरीदे गए किसी विशिष्ट स्वार्म सिस्टम का नाम, निर्माता और तैनाती की स्थिति बताते समय संबंधित आधिकारिक घोषणा या विश्वसनीय रिपोर्ट का उल्लेख करना चाहिए।
4. भारत में स्वार्म ड्रोन रिसर्च और प्रोटोटाइप
भारत में ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में रक्षा अनुसंधान संस्थानों, निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स की भागीदारी है। इनका काम स्वायत्त नेविगेशन, उड़ान नियंत्रण, सेंसर, संचार और कई ड्रोन के बीच समन्वय जैसी क्षमताओं से जुड़ा हो सकता है।
Avyaya Aerospace जैसी कंपनियों या अनुसंधान समूहों का उल्लेख करते समय यह स्पष्ट करें कि कौन-सी तकनीक वास्तव में प्रदर्शित की गई है और कौन-सी अभी विकास या परीक्षण के चरण में है।
भारत के लिए स्वदेशी ड्रोन तकनीक का महत्व केवल सैन्य उपयोग तक सीमित नहीं है। ऐसी तकनीक का उपयोग आपदा प्रबंधन, औद्योगिक निरीक्षण, कृषि और बड़े क्षेत्रों की निगरानी जैसे नागरिक क्षेत्रों में भी किया जा सकता है।
दुनिया के प्रमुख स्वार्म ड्रोन सिस्टम
कई देशों में स्वार्म ड्रोन और संबंधित स्वायत्त प्रणालियों पर अनुसंधान हुआ है। कुछ सिस्टम वास्तविक परीक्षणों के लिए जाने जाते हैं, जबकि कुछ व्यापक स्वायत्त ड्रोन तकनीक के उदाहरण हैं।
5. Perdix – अमेरिका
Perdix अमेरिकी रक्षा अनुसंधान एजेंसी DARPA से जुड़ा एक माइक्रो-ड्रोन स्वार्म प्रदर्शन कार्यक्रम है।
इस कार्यक्रम में छोटे ड्रोन के समूह को एक साझा मिशन के लिए समन्वित करने की क्षमता का प्रदर्शन किया गया। इसका प्रमुख उद्देश्य यह समझना था कि छोटे मानव रहित विमान समूह में कैसे काम कर सकते हैं।
Perdix स्वार्म तकनीक के विकास में महत्वपूर्ण अनुसंधान उदाहरण है। हालांकि, किसी पुराने प्रदर्शन की क्षमता को वर्तमान में परिचालन रूप से तैनात सिस्टम की क्षमता नहीं मानना चाहिए।
6. LOCUST – अमेरिका
LOCUST का पूरा नाम Low-Cost UAV Swarming Technology है। यह अमेरिकी नौसेना अनुसंधान कार्यालय से जुड़ी स्वार्म तकनीक की पहल रही है।
इस कार्यक्रम में छोटे मानव रहित विमानों को एक समूह के रूप में लॉन्च करने और समन्वित ढंग से संचालित करने की अवधारणा पर काम किया गया।
LOCUST का महत्व इस बात में है कि यह दिखाता है कि कई छोटे UAVs को एक साथ संचालित करने के लिए लॉन्च प्रणाली, संचार और नियंत्रण तकनीक कितनी महत्वपूर्ण हैं।
7. Kargu-2 – तुर्की
Kargu-2 तुर्की की STM कंपनी द्वारा विकसित एक रोटरी-विंग लोइटरिंग म्यूनिशन प्रणाली है। यह अपने स्वायत्त उड़ान और लक्ष्य पहचान से संबंधित तकनीकी पहलुओं के कारण चर्चा में रही है।
लोइटरिंग म्यूनिशन ऐसे मानव रहित सिस्टम होते हैं जो किसी क्षेत्र में उड़ान भर सकते हैं और मिशन की परिस्थितियों के अनुसार उपयोग किए जाते हैं।
Kargu-2 को स्वार्म तकनीक की चर्चा में शामिल किया जाता है, लेकिन इसकी व्यक्तिगत क्षमताओं और कई यूनिटों के बीच वास्तविक स्वार्म संचालन को अलग-अलग समझना चाहिए। इसकी परिचालन स्थिति और स्वायत्त हमले से संबंधित दावों के लिए विश्वसनीय स्रोतों का सहारा लेना जरूरी है।
8. चीन के स्वार्म ड्रोन प्रोजेक्ट
चीन ने बड़े समूहों में संचालित होने वाले ड्रोन और स्वायत्त UAV तकनीक पर विभिन्न परीक्षणों तथा प्रदर्शनों के माध्यम से ध्यान आकर्षित किया है।
स्वार्म ड्रोन का ऐसा समूह निगरानी, मानचित्रण और अन्य समन्वित मिशनों के लिए विकसित किया जा सकता है। सैन्य संदर्भ में इन तकनीकों के संभावित उपयोग पर भी चर्चा होती है।
हालांकि, चीन के किसी विशेष स्वार्म सिस्टम में ड्रोन की संख्या, एक ऑपरेटर द्वारा नियंत्रित यूनिटों की संख्या और वास्तविक परिचालन क्षमता से जुड़े आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। किसी प्रदर्शन में बड़ी संख्या में ड्रोन उड़ाना और उसी क्षमता को युद्ध की परिस्थितियों में लगातार बनाए रखना अलग बातें हैं।
9. Swarmer – यूक्रेन
Swarmer यूक्रेन से जुड़ा एक ऐसा नाम है जो ड्रोन संचालन के लिए सॉफ्टवेयर और स्वायत्त समन्वय तकनीक के संदर्भ में चर्चा में रहा है।
ऐसे सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म का उद्देश्य कई ड्रोन के संचालन को अधिक समन्वित बनाना और ऑपरेटर के काम को सरल करना हो सकता है।
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है: स्वार्म संचालन के लिए सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म और स्वयं उड़ने वाला ड्रोन एक ही उत्पाद नहीं हैं। इसलिए Swarmer को किसी विशेष ड्रोन मॉडल के बजाय संबंधित सॉफ्टवेयर और स्वायत्त नियंत्रण तकनीक के संदर्भ में समझना अधिक उपयुक्त है।
10. Icarus Swarms
Icarus Swarms नाम से संबंधित किसी विशिष्ट प्रणाली की पहचान, निर्माता और सत्यापित क्षमताओं की पुष्टि के बिना इसे किसी स्थापित सैन्य स्वार्म सिस्टम के रूप में प्रस्तुत नहीं करना चाहिए।
यदि इस नाम से जुड़ी परियोजना या उत्पाद का विश्वसनीय प्राथमिक स्रोत उपलब्ध हो, तो लेख में उसके निर्माता, विकास की स्थिति, प्रदर्शन और वास्तविक उपयोग का विवरण शामिल करें।
यदि पर्याप्त विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध न हो, तो पाठकों को गलत जानकारी देने से बचने के लिए इसकी जगह किसी स्पष्ट रूप से प्रलेखित स्वार्म तकनीक या अनुसंधान कार्यक्रम को शामिल करना बेहतर होगा।
भारत के अन्य महत्वपूर्ण ड्रोन: Netra और Nagastra-1
भारत की ड्रोन क्षमताओं को समझने के लिए केवल स्वार्म सिस्टम देखना पर्याप्त नहीं है। कुछ अन्य भारतीय ड्रोन भी निगरानी और रक्षा तकनीक के विकास को समझने में उपयोगी हैं।
DRDO Netra
Netra नाम से जुड़े भारतीय UAV कार्यक्रम निगरानी और टोही की क्षमताओं के लिए जाने जाते हैं। इस तरह के ड्रोन का इस्तेमाल किसी क्षेत्र की तस्वीरें या वीडियो प्राप्त करने और सुरक्षा संबंधी गतिविधियों की निगरानी के लिए किया जा सकता है।
Netra को स्वार्म ड्रोन का उदाहरण तभी माना जाना चाहिए, जब संबंधित मॉडल में कई ड्रोन के बीच समन्वित संचालन की पुष्टि हो। सामान्य निगरानी UAV और स्वार्म सिस्टम में अंतर बनाए रखना जरूरी है।
Nagastra-1
Nagastra-1 भारत में विकसित एक स्वदेशी लोइटरिंग म्यूनिशन प्रणाली है। यह सामान्य निगरानी ड्रोन से अलग श्रेणी में आता है।
लोइटरिंग म्यूनिशन और स्वार्म ड्रोन में तकनीकी समानताएं हो सकती हैं, लेकिन दोनों शब्दों का अर्थ समान नहीं है। Nagastra-1 का उल्लेख भारतीय रक्षा ड्रोन तकनीक के व्यापक संदर्भ में करना अधिक उपयुक्त है, न कि बिना पुष्टि के इसे स्वार्म ड्रोन घोषित करना।
स्वार्म ड्रोन को रोकने के लिए भार्गवस्त्र जैसे काउंटर-ड्रोन सिस्टम | Bhargavastra Counter Drone System
जैसे-जैसे ड्रोन तकनीक विकसित हो रही है, वैसे-वैसे उन्हें पहचानने, ट्रैक करने और रोकने वाली प्रणालियों का महत्व भी बढ़ रहा है। ऐसी तकनीकों को व्यापक रूप से काउंटर-UAS या एंटी-ड्रोन सिस्टम कहा जाता है।
काउंटर-ड्रोन प्रणाली का उद्देश्य अनधिकृत या संभावित खतरा पैदा करने वाले UAVs का पता लगाना और परिस्थितियों के अनुसार उनसे निपटना है।
भार्गवस्त्र क्या है? | Bhargavastra Kya Hai
Bhargavastra भारत में विकसित की जा रही ड्रोन-रोधी प्रणाली के रूप में चर्चा में रहा है। इसका उल्लेख छोटे ड्रोन और ड्रोन स्वार्म से उत्पन्न संभावित खतरों का मुकाबला करने वाली तकनीकों के संदर्भ में किया जा सकता है।
इसकी वर्तमान परिचालन स्थिति, परीक्षणों, प्रभावशीलता और स्वार्म के विरुद्ध विशिष्ट क्षमता को प्रकाशित करने से पहले आधिकारिक जानकारी से सत्यापित करना चाहिए।
काउंटर-ड्रोन सिस्टम कैसे काम करते हैं?
ऐसी प्रणालियों में अलग-अलग तकनीकों का संयोजन हो सकता है:
- ड्रोन डिटेक्शन: रडार, रेडियो-फ्रीक्वेंसी सेंसर या अन्य सेंसर की सहायता से ड्रोन का पता लगाना।
- ट्रैकिंग: ड्रोन की स्थिति और गतिविधि का आकलन करना।
- पहचान: उपलब्ध संकेतों के आधार पर ड्रोन और संभावित खतरे का वर्गीकरण करना।
- प्रतिक्रिया: परिस्थितियों के अनुसार अधिकृत इलेक्ट्रॉनिक, भौतिक या अन्य रक्षा उपाय अपनाना।
हर काउंटर-ड्रोन सिस्टम सभी प्रकार के ड्रोन के विरुद्ध समान रूप से प्रभावी नहीं होता। परिणाम ड्रोन के आकार, संख्या, पर्यावरण, सेंसर और सिस्टम की तकनीकी क्षमताओं पर निर्भर करते हैं।
भारत बनाम दुनिया: स्वार्म ड्रोन टेक्नोलॉजी की तुलना
भारत और अन्य देशों की स्वार्म ड्रोन तकनीक की तुलना करते समय केवल ड्रोन की संख्या या रेंज को आधार नहीं बनाना चाहिए। किसी भी सिस्टम की उपयोगिता उसकी तकनीकी परिपक्वता, विश्वसनीयता, लागत, संचार व्यवस्था और वास्तविक परीक्षणों पर भी निर्भर करती है।
| देश या क्षेत्र | उदाहरण | प्रमुख तकनीकी संदर्भ |
|---|---|---|
| भारत | Sheshnaag-150 और स्वदेशी स्वार्म परियोजनाएं | स्वदेशी ड्रोन विकास और समन्वित संचालन |
| अमेरिका | Perdix | माइक्रो-ड्रोन स्वार्म अनुसंधान |
| अमेरिका | LOCUST | छोटे UAVs का समूह संचालन |
| तुर्की | Kargu-2 | रोटरी-विंग लोइटरिंग म्यूनिशन |
| चीन | विभिन्न स्वार्म प्रदर्शन | बड़े ड्रोन समूह और स्वायत्त UAV अनुसंधान |
| यूक्रेन | Swarmer | ड्रोन समन्वय से जुड़ा सॉफ्टवेयर |
यह तालिका अलग-अलग प्रकार की तकनीकों का संक्षिप्त परिचय देती है। इसे परिचालन क्षमता या युद्धक प्रभावशीलता की प्रमाणित रैंकिंग नहीं समझना चाहिए।
स्वार्म ड्रोन तकनीक में किन बातों की तुलना करनी चाहिए?
- स्वायत्तता: सिस्टम कितना काम स्वयं कर सकता है और कहां मानव निगरानी आवश्यक है?
- समन्वय: क्या कई ड्रोन साझा मिशन में एक-दूसरे के साथ काम कर सकते हैं?
- संचार: क्या सिस्टम कठिन परिस्थितियों में भी विश्वसनीय संचार बनाए रख सकता है?
- विश्वसनीयता: क्या परीक्षणों में इसकी कार्यक्षमता बार-बार प्रदर्शित हुई है?
- लागत और रखरखाव: बड़ी संख्या में ड्रोन संचालित करने का खर्च कितना है?
- विकास की स्थिति: तकनीक अनुसंधान, प्रोटोटाइप, परीक्षण, खरीद या परिचालन तैनाती में से किस चरण में है?
इन मानकों के आधार पर तुलना करने से किसी भी देश की तकनीक को लेकर अधिक संतुलित और तथ्यात्मक निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. स्वार्म ड्रोन क्या होता है?
स्वार्म ड्रोन ऐसी प्रणाली है जिसमें कई ड्रोन किसी साझा मिशन के लिए समन्वित तरीके से काम करते हैं। यह समन्वय सॉफ्टवेयर, संचार और नियंत्रण तकनीक की मदद से किया जा सकता है।
2. क्या भारत में स्वार्म ड्रोन विकसित किए जा रहे हैं?
भारत में स्वदेशी सैन्य ड्रोन और स्वायत्त ड्रोन तकनीक पर काम हो रहा है। किसी विशेष स्वार्म परियोजना की वर्तमान स्थिति जानने के लिए आधिकारिक घोषणा और विश्वसनीय रक्षा रिपोर्ट देखनी चाहिए।
3. Sheshnaag-150 क्या है?
Sheshnaag-150 को स्वार्म स्ट्राइक ड्रोन परियोजना के संदर्भ में उल्लेखित किया जाता है। इसकी रेंज, परीक्षणों और परिचालन स्थिति से जुड़े दावों की पुष्टि विश्वसनीय स्रोतों से करना जरूरी है।
4. Perdix और LOCUST क्या हैं?
Perdix अमेरिकी रक्षा अनुसंधान से जुड़ा माइक्रो-ड्रोन स्वार्म कार्यक्रम है, जबकि LOCUST छोटे UAVs के समूह संचालन से संबंधित तकनीकी पहल है।
5. क्या Kargu-2 एक स्वार्म ड्रोन है?
Kargu-2 तुर्की की एक रोटरी-विंग लोइटरिंग म्यूनिशन प्रणाली है। इसे स्वार्म तकनीक की चर्चा में शामिल किया जाता है, लेकिन व्यक्तिगत ड्रोन की क्षमता और कई ड्रोन के वास्तविक स्वार्म संचालन में अंतर करना चाहिए।
6. क्या Netra और Nagastra-1 स्वार्म ड्रोन हैं?
Netra निगरानी UAV तकनीक से और Nagastra-1 लोइटरिंग म्यूनिशन श्रेणी से संबंधित हैं। इन्हें स्वार्म ड्रोन कहना तभी उचित होगा, जब संबंधित प्रणाली में स्वार्म संचालन की पुष्टि हो।
7. Bhargavastra क्या है?
Bhargavastra भारत की ड्रोन-रोधी तकनीक से संबंधित प्रणाली है, जिसे काउंटर-ड्रोन और एंटी-स्वार्म रक्षा के संदर्भ में समझा जा सकता है। इसकी वर्तमान स्थिति और क्षमताओं के लिए आधिकारिक स्रोत देखना चाहिए।
8. क्या स्वार्म ड्रोन पूरी तरह AI से नियंत्रित होते हैं?
नहीं। कुछ प्रणालियां स्वायत्त सॉफ्टवेयर और AI का इस्तेमाल कर सकती हैं, जबकि अन्य में मानव ऑपरेटर का महत्वपूर्ण नियंत्रण बना रहता है। स्वायत्तता का स्तर सिस्टम के डिजाइन और मिशन पर निर्भर करता है।
निष्कर्ष
स्वार्म ड्रोन तकनीक आधुनिक मानव रहित विमान प्रणालियों का एक महत्वपूर्ण विकास क्षेत्र है। भारत में स्वदेशी ड्रोन परियोजनाओं और काउंटर-ड्रोन तकनीक का विकास इस क्षेत्र की बढ़ती प्रासंगिकता को दर्शाता है। अमेरिका के Perdix और LOCUST जैसे अनुसंधान कार्यक्रम, तुर्की का Kargu-2 और अन्य देशों की परियोजनाएं भी इस तकनीकी क्षेत्र के अलग-अलग पहलुओं को समझने में मदद करती हैं।
हालांकि, सभी ड्रोन परियोजनाएं समान स्तर पर विकसित नहीं हैं। कुछ अनुसंधान या प्रदर्शन के चरण में हैं, जबकि कुछ अलग उद्देश्य वाली प्रणालियां हैं। इसलिए स्वार्म ड्रोन की वास्तविक क्षमता समझने के लिए उनकी सत्यापित विशेषताओं, परीक्षणों और परिचालन स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है।