Top Famous Madhubani Artists: मधुबनी पेंटिंग के प्रमुख कलाकार मुख्य रूप से बिहार के मिथिला क्षेत्र की महिलाएं रही हैं, जिन्होंने इसे विश्वविख्यात बनाया। ये कलाकार पद्मश्री जैसे सम्मानों से नवाजी गईं और कला को दीवारों से कैनवास तक ले गईं।
पद्मश्री प्राप्त प्रमुख कलाकार
जगदंबा देवी
जगदंबा देवी मधुबनी पेंटिंग की महान हस्तियों में से एक हैं, जिन्हें भारत की पहली पद्मश्री (1975) से सम्मानित किया गया। उन्होंने भरनी शैली (रंग भरकर बनाई जाने वाली पारंपरिक मिथिला चित्रकला) को वैश्विक पहचान दिलाई।
जगदंबा देवी का जन्म 1901 में बिहार के मधुबनी जिले के भोजपंडौल में हुआ था। वे बचपन से ही पारंपरिक मिथिला चित्रकला से जुड़ी रहीं और प्रारंभिक जीवन में ही इस कला के रंग और रूपों के साथ गहरा लगाव विकसित कर
भरनी शैली की प्रमुख कलाकार, जिसमें जीवंत रंग और सूक्ष्म रेखांकन का विशेष महत्व होता है। धार्मिक कथाएं, देवी-देवता, लोक जीवन और मिथिला संस्कृति को चित्रित किया। कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर लोकप्रिय बनाया।
जगदंबा देवी को 1975 में उनके असाधारण योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया। उन्होंने अपनी कला के माध्यम से मधुबनी चित्रकला को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
गंगा देवी
गंगा देवी मधुबनी पेंटिंग की महान कलाकारों में से एक हैं। उनका जन्म मधुबनी जिले के रसीदपुर में हुआ और उन्होंने लोक कला की पारंपरिक कचनी शैली को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। बारीक रेखाओं और सूक्ष्म विवरणों में उनकी महारत अद्वितीय मानी जाती है।
कचनी शैली की प्रमुख कलाकार, जिसमें सूक्ष्म रेखांकन और महीन विवरणों का विशेष महत्व होता है।
धार्मिक कथाएं, देवी-देवता और मिथिला संस्कृति को सूक्ष्मता और सटीकता के साथ चित्रित किया।
गंगा देवी को 1984 में उनके अद्वितीय योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया। उनकी कलाकृतियों ने मधुबनी चित्रकला को न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी व्यापक पहचान दिलाई।
महासुंदरी देवी
महासुंदरी देवी का जन्म 1922 में मधुबनी जिले के चतरा में हुआ था। उन्होंने पारंपरिक मधुबनी पेंटिंग के साथ-साथ सिक्की वर्क (धान की फाइबर से बनाई जाने वाली कला) में भी महारत हासिल की। उनका जीवन संघर्षपूर्ण रहा, फिर भी उन्होंने कला के प्रति अपने समर्पण और मेहनत से इस लोक कला को नई पहचान दिलाई।
मधुबनी पेंटिंग और सिक्की वर्क में उत्कृष्ट योगदान।
धार्मिक, लोक और सांस्कृतिक विषयों को बारीकी और सूक्ष्मता के साथ प्रस्तुत किया।
महासुंदरी देवी को 2011 में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया। उनके अथक प्रयासों ने मधुबनी और सिक्की कला को न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी मान्यता दिलाई।
सीता देवी
सीता देवी मधुबनी पेंटिंग की महान कलाकारों में से एक हैं, जिन्हें दीवारों पर बनाई जाने वाली पारंपरिक चित्रकला को कागज पर उतारने वाली पहली कलाकार माना जाता है। उनका जन्म जितवारपुर, मधुबनी में हुआ और उन्होंने इस कला को नए माध्यम पर ले जाकर इसे व्यापक पहचान दिलाई।
पारंपरिक मिथिला चित्रकला को दीवार से कागज और कैनवास पर रूपांतरित किया। धार्मिक, लोक और सांस्कृतिक कथाओं को जीवंत रंगों और सूक्ष्म रेखाओं के साथ चित्रित किया।
भद्रकाली देवी
भद्रकाली देवी मधुबनी पेंटिंग की विशिष्ट कलाकारों में से एक हैं। उनका जन्म हरलाखुड़, मधुबनी में हुआ और उन्होंने पारंपरिक गोदना शैली में महारत हासिल की।
गोदना शैली की प्रमुख कलाकार, जिसमें बारीक रेखाएं और ज्यामितीय पैटर्न प्रमुख होते हैं। उनकी कला में देवी-देवता, लोक कथाएं और मिथिला संस्कृति की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। पारंपरिक तकनीक और प्रतीकों का सटीक प्रयोग उनकी शैली की पहचान है।
जमुना देवी:
जमुना देवी मधुबनी पेंटिंग की प्रतिष्ठित कलाकारों में से एक हैं। उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया और उन्होंने पारंपरिक मधुबनी शैली में नई शैली स्थापित करके इस लोक कला को आधुनिक मंच पर पहचान दिलाई।
पारंपरिक तकनीकों के साथ आधुनिक प्रयोग और नए रंगों का उपयोग। मिथिला संस्कृति, लोक कथाएं और सामाजिक विषयों को चित्रित किया। उनकी शैली ने मधुबनी कला को नवाचार और विस्तार दोनों की दिशा दी।
रानी झा:
रानी झा समकालीन मधुबनी पेंटिंग की प्रमुख कलाकारों में से एक हैं। उन्होंने पारंपरिक मिथिला शैली को बनाए रखते हुए आधुनिक प्रयोग और नए विषयों को अपने चित्रों में समाहित किया, जिससे कला में परंपरा और आधुनिकता का सुंदर मिश्रण दिखाई देता है।
पारंपरिक मधुबनी तकनीक के साथ समकालीन रंग और डिज़ाइन का प्रयोग।
देवी-देवता, लोक कथाएं और सामाजिक विषयों को आधुनिक दृष्टिकोण से चित्रित किया।
उनकी शैली ने मधुबनी कला को युवा पीढ़ी और अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुँचाया।
प्रतीक प्रभाकर
प्रतीक प्रभाकर समकालीन मधुबनी पेंटिंग के प्रमुख कलाकारों में से एक हैं। वे पारंपरिक मिथिला शैली को आधुनिक दृष्टिकोण और नए विषयों के साथ प्रस्तुत करते हैं, जिससे मधुबनी कला की युवा और अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत हुई है।
पारंपरिक मधुबनी तकनीक के साथ नवीन प्रयोग और रंग संयोजन।
सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक विषयों को आधुनिक शैली में चित्रित किया।
उनकी कला में परंपरा और समकालीन दृष्टिकोण का संतुलित मिश्रण देखा जाता है।
संजय जायसवाल
संजय जायसवाल मधुबनी पेंटिंग के समकालीन कलाकारों में शामिल हैं। वे पारंपरिक मिथिला शैली को बनाए रखते हुए आधुनिक विषय और प्रयोग अपने चित्रों में शामिल करते हैं, जिससे कला में नवाचार और युवा दर्शकों के लिए आकर्षण बढ़ता है।
पारंपरिक मधुबनी तकनीक के साथ समकालीन रंग और डिज़ाइन का मिश्रण।
सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक विषयों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया।
उनकी शैली में परंपरा और आधुनिकता का संतुलित मेल देखने को मिलता है।
आशुतोष कुमार
आशुतोष कुमार समकालीन मधुबनी पेंटिंग के प्रमुख कलाकारों में से एक हैं। वे पारंपरिक मिथिला शैली को बनाए रखते हुए अपने चित्रों में आधुनिक प्रयोग और नवीन विषय जोड़ते हैं, जिससे मधुबनी कला को युवा और अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुँचाने में मदद मिली है।
पारंपरिक मधुबनी तकनीक के साथ समकालीन रंग और डिज़ाइन का प्रयोग। धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विषयों को नवीन दृष्टिकोण से चित्रित किया। उनकी शैली में परंपरा और आधुनिकता का संतुलित मिश्रण देखने को मिलता है।
मधुबनी चित्रकारी बनाने वाली सभी महिलाएं अनपढ़ घरेलू महिलाएं थीं, जिनकी कला ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दी। मधुबनी GI टैग वाली कला है, और ये कलाकार थंगका पेंटिंग की तरह सांस्कृतिक धरोहर हैं। उनके चित्र रामायण, प्रकृति, और मिथिला जीवन पर आधारित हैं।
