Bihar Cabinet 2025: जनता दल (यूनाइटेड) के प्रमुख नीतीश कुमार ने 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली है। इस ऐतिहासिक कार्यकाल की शुरुआत एक 31 सदस्यीय मंत्रिमंडल के गठन के साथ हुई है, जिसमें सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा जैसे दिग्गज नेताओं के साथ-साथ कुछ ऐसे चेहरे भी शामिल हैं, जिनके मंत्री बनने ने सभी को चौंका दिया है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनके दो उपमुख्यमंत्रियों के अलावा, इस मंत्रिमंडल में 8 कैबिनेट मंत्री और 20 राज्यमंत्री शामिल हैं। यहाँ हम मंत्रिमंडल के उन 12 चेहरों पर विस्तृत नज़र डाल रहे हैं, जिनकी नियुक्ति ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है।
नीतीश कैबिनेट 2025 के प्रमुख चेहरे | Bihar Cabinet 2025
1. रामकृपाल यादव (बीजेपी)
- विधानसभा क्षेत्र: दानापुर
- पृष्ठभूमि: दानापुर सीट से बीजेपी के इस दिग्गज नेता ने चुनाव जीता है। वह 1974 में मैट्रिक और 1978 में एएन कॉलेज से बीए उत्तीर्ण हैं।
- विवाद/संपत्ति: उनके खिलाफ दो आरोपिक मामले लंबित हैं। चल और अचल संपत्ति के मामले में उनकी पत्नी अधिक धनी हैं। उनके पास 14.16 लाख रुपये की चल संपत्ति है, जबकि उनकी पत्नी के पास 30.27 लाख रुपये की है। नौबतपुर थाना क्षेत्र में उनके पास सवा एकड़ कृषि योग्य भूमि है, जबकि उनकी पत्नी के पास पटना के जमाल रोड सहित विभिन्न हिस्सों में लगभग 1.55 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन है।
2. संजय सिंह ‘टाइगर’ (बीजेपी)
- विधानसभा क्षेत्र: आरा
- पृष्ठभूमि: भोजपुर के बिहिया प्रखंड के निवासी 50 वर्षीय संजय सिंह दूसरी बार विधायक बने हैं और पहली बार मंत्री बनाए गए हैं। उन्होंने पटना के एएन कॉलेज से स्नातक, एलएलबी और परास्नातक की डिग्री हासिल की है। चार भाइयों में सबसे छोटे संजय के पिता बिहार महालेखापाल कार्यालय में कार्यरत थे।
3. अरुण शंकर प्रसाद (बीजेपी)
- विधानसभा क्षेत्र: खजौली
- पृष्ठभूमि: बीजेपी के इस नेता ने राजद के बृज किशोर यादव को 13 हजार से अधिक वोटों के अंतर से हराकर लगातार दूसरी बार इस सीट पर जीत दर्ज की। इस जीत के बाद उन्हें मंत्रिमंडल में जगह मिली।
4. सुरेन्द्र मेहता (बीजेपी)
- विधानसभा क्षेत्र: बछवाड़ा
- पृष्ठभूमि: इनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और एआईएसएफ से हुई थी। वर्ष 2005 में वे बीजेपी में शामिल हुए और तत्कालीन बरौनी सीट से चुनाव लड़कर हार गए। 2015 में वे पहली बार बेगूसराय से विधायक बने और 2020 तथा 2025 में बछवाड़ा सीट से जीत दर्ज की। 2025 में उन्होंने एक लाख तीन सौ से अधिक मतों से जबरदस्त जीत हासिल करते हुए अपने पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया।
5. नारायण प्रसाद (बीजेपी)
- विधानसभा क्षेत्र: नौतन
- पृष्ठभूमि: तेली (साहू) समुदाय से आने वाले नारायण प्रसाद, जिन्हें स्थानीय स्तर पर नारायण प्रसाद साह के नाम से भी जाना जाता है, चौथी बार विधायक चुने गए हैं। इस समुदाय में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। उनके भाई हरेंद्र प्रसाद खेती-किसानी करते हैं।
6. रमा निषाद (बीजेपी)
- विधानसभा क्षेत्र: औराई
- पृष्ठभूमि: मुजफ्फरपुर के पूर्व सांसद अजय निषाद की पत्नी और कैप्टन जयनारायण निषाद की बहू रमा निषाद पहली बार विधायक बनी हैं। वह पहले हाजीपुर नगर परिषद की वार्ड पार्षद, उपाध्यक्ष और चेयरपर्सन रह चुकी हैं। माना जा रहा है कि निषाद समुदाय को साधने के लिए बीजेपी ने उन्हें औराई सीट से टिकट दिया और अब मंत्री पद भी दिया है।
7. लखेन्द्र कुमार रोशन (बीजेपी)
- विधानसभा क्षेत्र: पातेपुर
- पृष्ठभूमि: लखेन्द्र कुमार रोशन ने पातेपुर सीट से आरजेडी की प्रेमा चौधरी को 22,380 मतों के भारी अंतर से पराजित किया और मंत्रिमंडल में जगह बनाई।
8. श्रेयसी सिंह (बीजेपी)
- विधानसभा क्षेत्र: जमुई
- पृष्ठभूमि: जमुई सीट से लगातार दूसरी बार विधायक बनीं श्रेयसी सिंह नीतीश कैबिनेट में सबसे युवा और इकलौती एथलीट चेहरा हैं। एक खिलाड़ी होने के नाते वह युवाओं और खिलाड़ियों के लिए विशेष प्रयास करने के लिए जानी जाती हैं।
9. दीपक प्रकाश (राष्ट्रीय लोक मोर्चा)
- पृष्ठभूमि: राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र दीपक प्रकाश को मंत्री पद मिला है। युवा नेतृत्व, तकनीकी पृष्ठभूमि और राजनीतिक सक्रियता को देखते हुए उनकी नियुक्ति को एनडीए द्वारा नई पीढ़ी को अवसर देने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
10. संजय कुमार (लोक जनशक्ति पार्टी – रामविलास)
- विधानसभा क्षेत्र: बखरी
- पृष्ठभूमि: लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के टिकट पर बखरी सीट से चुनाव जीतने वाले संजय कुमार ने सीपीआई के सूर्यकांत पासवान को 17,318 मतों के अंतर से हराया। पिछले चुनाव में सूर्यकांत पासवान ने बीजेपी के रामशंकर पासवान को मात्र 777 मतों से हराया था।
11. प्रमोद कुमार (जनता दल-यूनाइटेड)
- पृष्ठभूमि: पूरा नाम प्रमोद कुमार चंद्रवंशी है, जो जहानाबाद के रहने वाले हैं। वह सरकार के मनोनयन पर विधायक कोटा से एमएलसी हैं और अब उन्हें मंत्री पद मिला है।
12. संजय कुमार सिंह (लोक जनशक्ति पार्टी – रामविलास)
- विधानसभा क्षेत्र: महुआ
- पृष्ठभूमि: लोजपा (रामविलास) के इस नेता ने सबसे चर्चित चुनावी मुकाबलों में से एक में राजद से अलग हुए तेज प्रताप यादव को महुआ सीट पर हराया। तेज प्रताप को हराने के कारण ही संजय कुमार सिंह का बिहार की राजनीति में कद काफी बढ़ गया है और उन्हें मंत्रिमंडल में स्थान दिया गया है।
13. लेशी सिंह
लेशी सिंह सीमांचल इलाक़े के पूर्णिया ज़िले की धमदाहा सीट से साल 2000 के बाद से लगातार चुनाव जीत रही हैं.
लेशी सिंह बिहार की पूर्ववर्ती सरकार में मार्च 2024 तक खाद्य मंत्री भी रही हैं.
1974 में पैदा हुई लेशी सिंह ने बारहवीं तक की पढ़ाई की है.
उनके पति बूटान सिंह पूर्णिया में राजनीति से जुड़े थे और साल 2000 में अदालत परिसर में उनकी हत्या कर दी गई थी.
बूटान सिंह पूर्णिया में समता पार्टी के जिलाध्यक्ष थे. आगे चलकर समता पार्टी ही 2003 में जनता दल यूनाइटेड बनी.
लेशी सिंह अपने पति की हत्या से पहले ही राजनीति में क़दम रख चुकी थीं लेकिन साल 2000 में उन्होंने धमदाहा सीट से उम्मीदवारी के साथ चुनावी राजनीति में क़दम रखा. इसके बाद से उन्होंने कोई चुनाव नहीं हारा है. लेशी सिंह बिहार के महिला आयोग की अध्यक्ष भी रही हैं.
वर्तमान सरकार में मंत्रीपद की शपथ लेने से पहले भी वो पिछली बिहार सरकार में खाद्य और उपभोक्ता संरक्षण विभाग की मंत्री रह चुकी हैं.
राजनीतिक कामयाबी के साथ-साथ लेशी सिंह विवादों से भी जुड़ी रही हैं. साल 2021 में लेशी सिंह को पत्रकार पिंटू राय उर्फ़ विश्वजीत सिंह की हत्या के मामले में अभियुक्त बनाया गया था. पिंटू राय स्थानीय राजनीति में भी सक्रिय थे. लेशी सिंह ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया था.
पिंटू राय की हत्या के मामले में पुलिस किसी को गिरफ़्तार नहीं कर सकी थी.
साल 2022 में जेडीयू की ही विधायक बीमा भारती ने लेशी सिंह पर अपराधों में लिप्त होने के आरोप लगाए थे. लेशी सिंह ने इन्हें राजनीति से प्रेरित बताकर खारिज किया था.
14. मोहम्मद ज़मा ख़ान
नीतीश कुमार की पूर्ववर्ती सरकार में एकमात्र मुसलमान मंत्री रहे मोहम्मद ज़मान ख़ान को इस बार भी मंत्री बनाया गया है.
नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड के टिकट पर कैमूर ज़िले की चैनपुर विधानसभा सीट से चुनाव जीतने वाले मोहम्मद ज़मान ख़ान लगातार दूसरी बार विधायक बने हैं.
साल 2020 में मोहम्मद ज़मा ख़ान ने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था. हालांकि बाद में वो नीतीश कुमार की जेडीयू में शामिल हो गए थे और सरकार में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री बने.
बीजेपी और जदयू के नेतृत्व वाले गठबंधन एनडीए को इस बार बिहार विधानसभा चुनावों में 243 में से 202 सीटें मिली हैं. मोहम्मद ज़मा ख़ान बिहार में एनडीए के एकमात्र मुसलमान विधायक हैं.
बिहार में साल 2022-23 में हुए जातिगत सर्वे के मुताबिक़ राज्य में 17.7 प्रतिशत मुसलमान आबादी है.
लेकिन राजनीतिक प्रतिनिधित्व में मुसलमान बहुत पीछे हैं. राज्य में इस बार सिर्फ़ 11 मुसलमान विधायक चुन कर आए हैं.
इस नए मंत्रिमंडल के गठन को एनडीए गठबंधन में सभी सहयोगी दलों और सामाजिक समूहों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। युवाओं, महिलाओं और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों को शामिल करने के साथ-साथ, इसमें कुछ ऐसे अनुभवी नेताओं को भी जगह दी गई है, जिनके पास प्रशासनिक अनुभव है। नीतीश कुमार की यह नई टीम बिहार के विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाने में कितनी सफल होती है, यह भविष्य के गर्त में है।
