आकाश प्राइम क्या है? | Akash Prime Missile

भारत ने 1980 के दशक से वर्तमान के वर्षों में रक्षा क्षेत्र खासकर मिसाइल टेक्नोलॉजी में तेजी से प्रगति की है। इन वर्षों में घरेलू तकनीक से बनी मिसाइलें आज भारत को आत्मनिर्भर (Atmanirbhar Bharat) बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इस आत्मनिर्भरता का सबसे बड़ा उदाहरण आकाश प्राइम मिसाइल है।

ऐसे ही तकनीक से बनी एक मिसाइल सिस्टम जिसका नाम है आकाश प्राइम (Akash Prime)”, जिसे DRDO ने विकसित किया है। यह मिसाइल भारत की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली (Surface to Air Missile System) का एक एडवांस सिस्टम है।

आकाश मिसाइल सिस्टम के बारे में जानने से पहले DRDO अर्थात Defence Research Development Organisation के बारे में जानते है:

जानिए कैसे DRDO भारत की रक्षा तकनीक की रीढ़ है!

DRDO अर्थात Defence Research and Development Organisation भारत सरकार का रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन है। DRDO की स्थापना 1958 में हुई थी। DRDO भारतीय सेना के लिए रक्षा तकनीकों को स्वदेशी रूप से विकसित करता है। और अपनी स्थापना से अबतक लेकर आज तक इसने कई तरह के मिसाइल, रडार, टैंक, और रक्षा प्रणालियों का विकास किया है।

आकाश मिसाइल प्रणाली का इतिहास


Akash Mk1
2007पहला स्वदेशी SAM (Surface to Air Missile)
Akash Mk1S2019बेहतर टारगेटिंग क्षमता और सटीकता
Akash Prime2021नई सेंसर तकनीक

आकाश प्राइम क्या है?

What is Akash Prime?

Akash Prime मिसाइल भारत की आकाश मिसाइल प्रणाली का उन्नत (Advanced) version है। इस मिसाइल का 2021 में DRDO द्वारा सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया था। इस मिसाइल का भारतीय सेना और वायुसेना द्वारा हवाई खतरों से रक्षा करने के लिए किया जा रहा है। आकाश प्राइम की प्रदर्शन की झलक मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के हमलों को रोक कर दिखा।

Akash Prime Missile के प्रमुख फीचर्स

मिसाइल प्रकारसतह से हवा में मार करने वाली (SAM)
निर्माताDRDO & BDL (भारत डायनामिक्स लिमिटेड)
रेंज (Range)लगभग 30-35 किमी
स्पीड (Speed)लगभग 860-900 मीटर/सेकंड (माच 2.5)
गतिहाई सुपरसोनिक
मारक क्षमताएयरक्राफ्ट, ड्रोन्स, मिसाइल
गाइडेंस सिस्टमनया Active RF Seeker
लॉन्च प्लेटफॉर्म
मोबाइल लॉन्चर
मोबाइल लॉन्चर

आकाश प्राइम की तकनीकी विशेषताएं:

Akash Prime missile range: आकाश प्राइम की रेंज लगभग 30-35 किलोमीटर है।

Range of Akash Prime missile: यह मिसाइल मध्यम दूरी तक हवाई लक्ष्यों को निशाना बना सकती है।

Akash Prime missile speed: इसकी गति लगभग 860 m/s (Mach 2.5) है, जिससे यह लक्ष्य तक बहुत तेजी से पहुंचती है।

DRDO Akash Prime missile: यह DRDO द्वारा डिजाइन की गई मिसाइल है, जिसे भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) द्वारा निर्मित किया गया है।

नई गाइडेंस प्रणाली: इसमें Active RF Seeker का उपयोग किया गया है जो इसे पहले से अधिक सटीक बनाता है।

सभी मौसमों में क्षमता (All-Weather Capability): यह दिन और रात के साथ-साथ किसी भी मौसम में काम कर सकती है।

ऑटोमैटिक लॉन्चिंग सिस्टम: मोबाइल ट्रक लॉन्चर से यह तेज़ी से दागी जा सकती है।

इलेक्ट्रॉनिक काउंटर सिस्टम से लैस: यह दुश्मन के रेडार जामिंग को भी नाकाम कर सकती है।

Akash vs Akash Prime: क्या अंतर है?

विशेषताAkash Mk1
Akash Prime
Akash Prime
गाइडेंसCommand GuidanceActive RF Seeker
रेंज25 किमी30-35 किमी
सटीकतासामान्यअधिक सटीक
ऑल-वेदर क्षमतासीमितपूर्ण ऑल-वेदर
स्पीडMach 2.0Mach 2.5

भारत की सुरक्षा में आकाश प्राइम का योगदान

यह मिसाइल भारत की एयर डिफेंस नेटवर्क को और मजबूत बनाएगी।

दुश्मन के लड़ाकू विमानों, ड्रोन और मिसाइलों को आसमान में ही नष्ट करने की क्षमता रखती है।

चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के संदर्भ में इसकी उपयोगिता और भी अधिक है।

आकाश मिसाइल की भविष्य की योजनाएं

DRDO भविष्य में Akash-NG (New Generation) पर कार्य कर रहा है जिसकी रेंज और सटीकता और भी अधिक होगी।

इसे भारतीय नौसेना और तट रक्षक बल के लिए भी उपयुक्त बनाया जा रहा है।

आकाश मिसाइल संबंधित पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Akash Prime missile की रेंज कितनी है?

Akash Prime missile की रेंज लगभग 30 से 35 किलोमीटर तक है।

Akash Prime missile की गति कितनी है?

यह सुपरसोनिक मिसाइल है और इसकी गति 860 मीटर/सेकंड (Mach 2.5) है।

आकाश मिसाइल को किसने बनाया है?

इसे DRDO द्वारा डिज़ाइन किया गया है और BDL द्वारा निर्मित किया गया है।

यह किस प्रकार की मिसाइल है?

यह एक Surface to Air Missile (SAM) है, जो सतह से हवा में लक्ष्य को मारती है।

निष्कर्ष:

आकाश प्राइम सिर्फ एक मिसाइल नहीं, बल्कि भारत की रक्षा शक्ति का प्रतीक है। यह तकनीकी उन्नति, आत्मनिर्भरता और सुरक्षा का बेहतरीन उदाहरण है। DRDO की यह उपलब्धि भविष्य में भारत की सीमाओं की रक्षा को और भी मजबूत करेगी।







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