sawan kab se hai : सावन जिसे श्रावण मास भी कहा जाता है, हिंदू पंचांग का पाँचवाँ महीना है और भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ पूर्णिमा 10 जुलाई को मनाई जाएगी। इसके अगले दिन यानी 11 जुलाई से सावन के महीने की शुरुआत(sawan kab se lagega) होगी और सावन 9 अगस्त 2025 तक(sawan kab lagega) रहेगा।
सावन का पहला सोमवार कब है? |savan ka pahla somwar kab hai
सावन का पहला सोमवार 14 जुलाई को है। इस दिन से सावन का महीना शुरू हो रहा है और इसी दिन से 16 सोमवार व्रत की शुरुआत भी की जा सकती है.
सावन का पहला सोमवार: | 14 जुलाई, 2025 को है. |
सावन का महीना: | 11 जुलाई से 9 अगस्त तक रहेगा. |
16 सोमवार व्रत: | 14 जुलाई से शुरू किया जा सकता है. |
सावन में सोमवार का महत्व: सावन के सोमवार का व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने और उनकी कृपा पाने के लिए रखा जाता है.
सावन 2025 की तिथियाँ | Sawan Kab Se Hai:
प्रारंभ(): | 11 जुलाई 2025 |
समापन: | 9 अगस्त 2025 |
सावन सोमवार व्रत: | 14 जुलाई 21 जुलाई 28 जुलाई 4 अगस्त |
sawan ka last somwar kab hai/sawan ka akhri somwar kab hai: 4 अगस्त
सावन का धार्मिक महत्व:
समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने ग्रहण किया था, जिससे उनका कंठ नीला हो गया और वे नीलकंठ कहलाए. इस मास में शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है. माता पार्वती ने इसी महीने में शिव को पाने के लिए कठोर तप किया था.
सावन में पूजा विधि:
- ब्रह्ममुहूर्त में स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें
- शिवलिंग पर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, जल) से अभिषेक करें
- बेलपत्र, धतूरा, शमीपत्र, और भस्म अर्पित करें
- ॐ नमः शिवाय, महामृत्युंजय मंत्र, या शिव चालीसा का पाठ करें
सावन में क्या न करें:
- मांसाहार, प्याज, लहसुन, शराब और तंबाकू से परहेज करें
- बाल और नाखून काटने से बचें
- क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूरी बनाए रखें
सावन की शिवरात्रि कब है?|sawan ki shivratri kab hai?
सावन की शिवरात्रि 23 जुलाई, 2025 (बुधवार) को मनाई जाएगी। सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 23 जुलाई को सुबह 04:39 बजे से शुरू होगी और 24 जुलाई को सुबह 02:28 बजे समाप्त होगी। चूंकि निशिता काल (अर्धरात्रि का समय) 23 जुलाई को ही पड़ रहा है, इसलिए सावन शिवरात्रि 23 जुलाई को मनाई जाएगी।
सावन के प्रमुख शिव मंत्र और उनके अर्थ क्या हैं?
सावन के प्रमुख शिव मंत्र और उनके अर्थ इस पवित्र महीने में भगवान शिव की कृपा पाने के लिए मंत्रों का जाप अत्यंत फलदायी माना जाता है। यहाँ कुछ शक्तिशाली शिव मंत्र दिए गए हैं, साथ में उनके सरल अर्थ भी:
ॐ नमः शिवाय
मंत्र अर्थ: “मैं शिव को नमन करता हूँ।”
यह पंचाक्षरी मंत्र आत्मा की शुद्धि करता है और शिव से जुड़ने का सबसे सरल माध्यम है।
महामृत्युंजय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
अर्थ: “हम उस त्रिनेत्रधारी शिव की उपासना करते हैं जो सुगंधित हैं और पोषण देने वाले हैं। जैसे खीरा बेल से अलग होता है, वैसे ही हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें।”
यह मंत्र रोग, भय और अकाल मृत्यु से रक्षा करता है।
शिव गायत्री मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि।
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
अर्थ: “हम शिव को जानें, महादेव का ध्यान करें, और रुद्र हमें प्रेरणा दें।”
यह मंत्र शिवतत्त्व की प्राप्ति में सहायक है।
ॐ नमो भगवते रूद्राय
अर्थ: “मैं भगवान रूद्र को नमन करता हूँ।”
यह रूद्र रूप की आराधना के लिए उपयुक्त है, जो शिव का उग्र स्वरूप है।
धन प्राप्ति मंत्र
ॐ ह्रौं शिवाय शिवपराय फट्॥
अर्थ: “हे शिव! मुझे धन, समृद्धि और सुरक्षा प्रदान करें।”
यह मंत्र विशेष रूप से आर्थिक उन्नति के लिए उपयोग किया जाता है।
सावन में शिव पूजा के अन्य प्रमुख रीति-रिवाज क्या हैं?
सावन में शिव पूजा के प्रमुख रीति-रिवाज भक्तों द्वारा इस पवित्र महीने में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए अनेक पारंपरिक विधियाँ अपनाई जाती हैं। यहाँ कुछ विशेष रीति-रिवाज दिए गए हैं जो सावन में आमतौर पर पालन किए जाते हैं:
पूजा की विशेष विधियाँ
जलाभिषेक:
गंगाजल या शुद्ध जल से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। सोमवार को यह विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
पंचामृत स्नान:
दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से शिवलिंग को स्नान कराना अत्यंत पुण्यकारी होता है।
बेलपत्र अर्पण:
त्रिपत्री बेलपत्र शिव को अत्यंत प्रिय हैं। इन्हें उल्टा नहीं चढ़ाना चाहिए।
धतूरा, भांग और आक के फूल:
ये सभी वस्तुएँ भगवान शिव को प्रिय हैं और सावन में विशेष रूप से अर्पित की जाती हैं।
दीप और धूप जलाना:
पूजा स्थल पर गाय के घी या तिल के तेल से दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
मंत्र जाप और पाठ
ॐ नमः शिवाय और महामृत्युंजय मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करें। शिव चालीसा, रुद्राष्टकम या शिव पुराण का पाठ करना अत्यंत फलदायी होता है।
व्रत और उपवास
सावन सोमवार व्रत:
हर सोमवार को उपवास रखकर शिव की विशेष पूजा की जाती है।
मंगला गौरी व्रत:
विवाहित महिलाएँ मंगलवार को यह व्रत रखती हैं, विशेष रूप से सौभाग्य की प्राप्ति के लिए।
अन्य धार्मिक गतिविधियाँ
- शिव मंदिरों में दर्शन:
- विशेष रूप से ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करना शुभ माना जाता है।
- दान और सेवा:
- गरीबों को भोजन, वस्त्र या जल दान करना पुण्यदायी होता है।
- सात्विक जीवनशैली:
- मांसाहार, मदिरा, तंबाकू आदि से परहेज करना चाहिए।
शिव पूजा के लिए प्रमुख व्रत कथाएँ क्या हैं?
शिव पूजा के लिए प्रमुख व्रत कथाएँ भक्तों को भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए व्रत कथाएँ सुनना अत्यंत शुभ माना जाता है। यहाँ कुछ प्रसिद्ध व्रत कथाएँ दी गई हैं जो सावन और शिव पूजा के दौरान विशेष रूप से पढ़ी या सुनी जाती हैं:
- महाशिवरात्रि व्रत कथा
यह कथा गुरु-द्रुह नामक एक भील की है, जो अनजाने में शिवरात्रि का व्रत करता है। बेलपत्र और जल शिवलिंग पर अर्पित करने से उसके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। भगवान शिव प्रकट होकर उसे मोक्ष प्रदान करते हैं। - सावन सोमवार व्रत कथा
एक धनी व्यापारी संतान प्राप्ति के लिए सोमवार व्रत करता है। भगवान शिव उसे पुत्र का वरदान देते हैं, लेकिन उसकी आयु केवल 12 वर्ष होती है। व्यापारी की श्रद्धा और पुत्र की भक्ति से शिव प्रसन्न होकर उसे जीवनदान देते हैं। - पशुपति व्रत कथा
एक गरीब ब्राह्मण भगवान पशुपतिनाथ का भक्त होता है। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिव उसे स्वप्न में खजाने का संकेत देते हैं। यह कथा बताती है कि श्रद्धा और विश्वास से जीवन की कठिनाइयाँ दूर होती हैं।
शिव पूजा से जुड़े अन्य प्रमुख व्रत और त्योहार कौन से हैं?
शिव पूजा से जुड़े प्रमुख व्रत और त्योहार हिंदू धर्म में भगवान शिव की आराधना के लिए कई विशेष व्रत और पर्व मनाए जाते हैं, जो भक्तों को आध्यात्मिक उन्नति, सुख-शांति और मोक्ष की ओर ले जाते हैं। यहाँ कुछ प्रमुख व्रत और त्योहारों की सूची दी गई है:
- प्रदोष व्रत:
हर माह की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। यह व्रत शाम के समय किया जाता है और शिवजी की कृपा से पापों का नाश होता है। - सोलह सोमवार व्रत:
लगातार 16 सोमवार तक शिवजी की पूजा की जाती है। यह व्रत विवाह, संतान और सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है। - हरितालिका तीज व्रत:
भाद्रपद शुक्ल तृतीया को महिलाएँ यह व्रत रखती हैं। यह व्रत माता पार्वती द्वारा शिव को पति रूप में पाने की कथा से जुड़ा है। - श्रावण सोमवार व्रत:
सावन महीने के प्रत्येक सोमवार को शिवजी की विशेष पूजा की जाती है। यह व्रत विशेष फलदायी माना जाता है। - शिवमुष्टिव्रत:
महाराष्ट्र में विवाह के बाद पाँच वर्षों तक सावन के सोमवार को विशेष पूजा की जाती है। - शिवपरिक्रमा व्रत:
शिवलिंग की एक लाख परिक्रमा करने का संकल्प लिया जाता है। यह व्रत विशेष कामनाओं की पूर्ति के लिए किया जाता है।
प्रमुख त्योहार
- महाशिवरात्रि:
फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी को मनाया जाता है। यह शिवजी के विवाह का पर्व है और रात्रि जागरण व उपवास के साथ मनाया जाता है। - सावन शिवरात्रि | sawan ki shivratri:
सावन महीने की मासिक शिवरात्रि, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक के लिए विशेष मानी जाती है। - नाग पंचमी:
सावन शुक्ल पंचमी को मनाया जाता है। इस दिन शिवजी के साथ नाग देवता की पूजा की जाती है। - हरियाली तीज:
सावन में मनाया जाने वाला यह पर्व शिव-पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक है। महिलाएँ व्रत रखती हैं और झूला झूलती हैं। - रक्षाबंधन:
सावन पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह भाई-बहन के प्रेम का पर्व है, और इस दिन शिवजी की पूजा भी की जाती है।