Guru Purnima Significance: गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति का एक पावन पर्व है, जो हर साल आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह दिन गुरु-शिष्य परंपरा को सम्मान देने और जीवन में गुरु के योगदान को याद करने के लिए समर्पित है। वर्ष 2026 में गुरु पूर्णिमा 26 जुलाई, गुरुवार को मनाई जाएगी।
गुरु पूर्णिमा का महत्व क्या है? जानिए इस पावन पर्व का इतिहास, धार्मिक मान्यताएँ और आज के युग में गुरु की भूमिका विस्तार से।
गुरु पूर्णिमा का महत्व | Guru Purnima Significance:
गुरु का स्थान:
हिंदू धर्म में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान पूज्य माना गया है।
ज्ञान और मार्गदर्शन:
गुरु को अंधकार दूर करने वाला और ज्ञान का प्रकाश देने वाला बताया गया है।
धार्मिक मान्यता:
हिंदू धर्म:
गुरु को ईश्वर के समकक्ष माना जाता है।
बौद्ध धर्म:
इसी दिन भगवान बुद्ध ने सारनाथ में अपने पाँच शिष्यों को पहला उपदेश दिया था।
जैन धर्म:
इस दिन महावीर स्वामी के प्रथम शिष्य गौतम स्वामी को दीक्षा मिली थी।
गुरु पूर्णिमा क्यों मनाते हैं
गुरु पूर्णिमा 2025
गुरु पूर्णिमा का इतिहास
गुरु पूर्णिमा का महत्व:
गुरु के प्रति कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करना। समाज में शिक्षा और मार्गदर्शन की परंपरा को जीवित रखना। विद्यार्थियों को गुरु के महत्व का बोध कराना।
गुरु शिष्य परंपराएँ और उत्सव:
शिष्यों द्वारा अपने गुरु को पूजा और सम्मान अर्पित किया जाता है। मंदिरों और आश्रमों में विशेष कार्यक्रम आयोजित होते हैं। विद्यालयों में छात्र गुरु पूर्णिमा पर भाषण और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं।
