छठ पूजा 2026: जानिए महत्व, पूजा विधि, चार दिन के नियम और तारीख | Chhath Puja Significance Vidhi

Chhath Puja Significance Vidhi: भारत में मनाए जाने वाले प्रमुख धार्मिक त्योहारों में छठ पूजा का विशेष स्थान है। छठ महापर्व (Chhath Puja) भगवान सूर्य और छठी मैया की उपासना का ऐसा पर्व है, जिसमें भक्त डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और संतान की खुशहाली की कामना करते हैं।

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मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल में मनाया जाने वाला यह चार दिवसीय महापर्व अब देश के विभिन्न हिस्सों और विदेशों में भी बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

छठ पूजा के दौरान नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य जैसे चार प्रमुख अनुष्ठान किए जाते हैं। इस पर्व में व्रती कठिन उपवास रखते हैं और नदी, तालाब या अन्य जलाशयों में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं।

छठ पूजा 2026 की शुरुआत 13 नवंबर से होगी और इसका समापन 16 नवंबर 2026 को उषा अर्घ्य के साथ होगा।

आइए जानते हैं छठ पूजा का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व क्या है, छठ महापर्व क्यों मनाया जाता है, चार दिनों तक कौन-कौन से अनुष्ठान किए जाते हैं और छठ पूजा की परंपराएं क्या हैं।

छठ पूजा क्या है? (What is Chhath Puja?)

छठ पूजा भारत के सबसे प्राचीन और पवित्र हिंदू त्योहारों में से एक है। इसे छठ महापर्व या सूर्य षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से भगवान सूर्य और छठी मैया की उपासना के लिए मनाया जाता है। छठ पूजा में श्रद्धालु परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन की कामना करते हैं। इस चार दिवसीय महापर्व में व्रत रखने वाले श्रद्धालु कठिन नियमों का पालन करते हुए उपवास करते हैं और नदी, तालाब या अन्य जलाशयों में खड़े होकर डूबते और उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं। छठ पूजा की सबसे खास बात इसकी सादगी, पवित्रता, प्रकृति के प्रति आभार और सूर्य देव के प्रति अटूट आस्था है।

छठ महापर्व किन देवी-देवताओं को समर्पित है?

छठ महापर्व मुख्य रूप से भगवान सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार सूर्य देव को ऊर्जा, प्रकाश, स्वास्थ्य और जीवन का आधार माना जाता है। वहीं छठी मैया को संतान की रक्षा करने वाली और परिवार को सुख-समृद्धि प्रदान करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। इस पर्व में श्रद्धालु सूर्य देव को संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। छठ पूजा में प्रकृति, जल और सूर्य के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भी विशेष महत्व है।

छठ पूजा कहां-कहां मनाई जाती है?

छठ पूजा मुख्य रूप से भारत के बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई जाती है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल, दिल्ली, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र सहित देश के कई राज्यों में भी छठ महापर्व की धूम देखने को मिलती है। बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश से दूसरे राज्यों में जाकर बसे लोग भी इस पर्व को अपनी पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार मनाते हैं। भारत के अलावा नेपाल के तराई क्षेत्रों में भी छठ पूजा का विशेष महत्व है। आज यह त्योहार देश-विदेश में रहने वाले भारतीय समुदाय के बीच आस्था और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बन चुका है।

छठ पूजा का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व (Chhath Puja Significance)

छठ पूजा केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, प्रकृति के प्रति आभार और पारिवारिक सुख-समृद्धि का प्रतीक है। छठ महापर्व का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व प्राचीन काल से जुड़ा हुआ माना जाता है। इस पर्व में भगवान सूर्य और छठी मैया की पूजा की जाती है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार सूर्य देव की उपासना करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, स्वास्थ्य और समृद्धि आती है। वहीं छठी मैया की पूजा संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली के लिए की जाती है। इस पर्व में व्रत रखने वाले श्रद्धालु लगभग 36 घंटे तक निर्जला उपवास करते हैं और उगते तथा डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। छठ पूजा हमें प्रकृति, जल, वायु और सूर्य जैसे जीवनदायी तत्वों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने की सीख देती है।

1. छठ पूजा क्यों मनाई जाती है?

छठ पूजा मुख्य रूप से भगवान सूर्य और छठी मैया का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य देव की पूजा करने से परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है। वहीं छठी मैया से संतान की लंबी आयु, संतान प्राप्ति और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की जाती है।

इस पर्व में महिलाएं और पुरुष दोनों कठिन व्रत रखते हैं। श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और पवित्रता के साथ चार दिनों तक चलने वाली छठ पूजा की परंपराओं का पालन करते हैं। छठ पूजा का एक उद्देश्य प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करना भी है, क्योंकि सूर्य, जल और पृथ्वी सभी जीवों के जीवन का आधार हैं।

2. सूर्य देव की उपासना का महत्व

हिंदू धर्म में भगवान सूर्य को प्रत्यक्ष देवता माना जाता है, क्योंकि वे प्रतिदिन संसार को प्रकाश और ऊर्जा प्रदान करते हैं। सूर्य को जीवन, स्वास्थ्य, शक्ति और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। छठ पूजा में सूर्य देव की विशेष उपासना की जाती है और उन्हें संध्या अर्घ्य तथा प्रातःकालीन अर्घ्य दिया जाता है।

छठ पूजा की एक विशेष परंपरा यह है कि इसमें डूबते और उगते दोनों सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर श्रद्धालु उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं, जबकि उगते सूर्य की पूजा नए जीवन, ऊर्जा और आशा का प्रतीक मानी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सूर्य देव की उपासना करने से परिवार में सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है।

3. छठी मैया की पूजा क्यों की जाती है?

छठी मैया को संतान की रक्षा करने वाली और बच्चों को सुखी एवं स्वस्थ जीवन प्रदान करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं में उन्हें भगवान सूर्य की बहन तथा कुछ परंपराओं में षष्ठी देवी या देवसेना से जोड़ा जाता है।

छठ पूजा के दौरान महिलाएं विशेष रूप से अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य के लिए व्रत रखती हैं। जिन दंपतियों को संतान की इच्छा होती है, वे भी छठी मैया से संतान प्राप्ति की कामना करते हैं। छठी मैया की पूजा में श्रद्धालु फल, ठेकुआ, गन्ना और अन्य पारंपरिक प्रसाद अर्पित करते हैं।

4. छठ पूजा से जुड़ी पौराणिक कथाएं

छठ पूजा के इतिहास और महत्व को समझने के लिए इससे जुड़ी कुछ प्रसिद्ध पौराणिक कथाओं को जानना जरूरी है। इन कथाओं का उल्लेख लोकपरंपराओं और विभिन्न धार्मिक मान्यताओं में मिलता है।

(क) महाभारत में कर्ण और सूर्य उपासना की कथा

महाभारत के अनुसार कर्ण भगवान सूर्य के पुत्र थे। कर्ण प्रतिदिन सूर्य देव की पूजा करते थे और उन्हें जल अर्पित करते थे। वे सूर्य देव के परम भक्त माने जाते थे। धार्मिक और लोकमान्यताओं में कर्ण की सूर्य उपासना को छठ पर्व की परंपरा से भी जोड़ा जाता है।

(ख) द्रौपदी और पांडवों की छठ पूजा से जुड़ी कथा

लोकमान्यताओं के अनुसार जब पांडव अपना राजपाट खोकर कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे थे, तब द्रौपदी ने सूर्य देव की उपासना और व्रत किया था। मान्यता है कि उनकी श्रद्धा और पूजा से पांडवों को संकट से बाहर निकलने में सहायता मिली। इस कथा को छठ पूजा के धार्मिक महत्व से जोड़कर देखा जाता है।

(ग) राजा प्रियव्रत और षष्ठी देवी की कथा

एक प्रचलित पौराणिक कथा के अनुसार राजा प्रियव्रत और उनकी पत्नी मालिनी को संतान प्राप्ति नहीं हो रही थी। महर्षि कश्यप के सुझाव पर उन्होंने पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ करवाया। इसके बाद उन्हें एक मृत पुत्र की प्राप्ति हुई। राजा और रानी दुखी हो गए। तभी षष्ठी देवी प्रकट हुईं और अपनी कृपा से उस बालक को जीवनदान दिया। इसी मान्यता के आधार पर षष्ठी देवी को संतान की रक्षा करने वाली देवी माना जाता है और उनकी पूजा की जाती है।

(घ) भगवान राम और माता सीता द्वारा सूर्य उपासना की कथा

कुछ लोकमान्यताओं के अनुसार भगवान राम और माता सीता ने लंका विजय के बाद अयोध्या लौटकर कार्तिक मास में सूर्य देव की उपासना और व्रत किया था। इस कथा को भी छठ पूजा की परंपरा से जोड़ा जाता है। हालांकि, इसे छठ पर्व की उत्पत्ति का प्रमाणित ऐतिहासिक विवरण नहीं, बल्कि प्रचलित धार्मिक मान्यता के रूप में प्रस्तुत करना उचित है।

छठ पूजा 2026 कब है? (Chhath Puja 2026 Date)

छठ पूजा 2026 का महापर्व रविवार, 15 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा। यह पर्व कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। छठ पूजा का त्योहार चार दिनों तक चलता है, जिसकी शुरुआत नहाय-खाय से होती है और समापन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलने यानी पारण के साथ होता है।

साल 2026 में छठ पूजा की शुरुआत शुक्रवार, 13 नवंबर को नहाय-खाय से होगी। इसके बाद 14 नवंबर को खरना, 15 नवंबर को संध्या अर्घ्य और 16 नवंबर को उषा अर्घ्य दिया जाएगा। Drikpanchang+2

1. छठ पूजा 2026 का चार दिवसीय कैलेंडर

छठ महापर्व के चारों दिनों का अपना अलग धार्मिक महत्व और पूजा-विधान है। आइए जानते हैं छठ पूजा 2026 के चार दिवसीय कैलेंडर के बारे में:

दिन और तारीखपर्व / पूजाधार्मिक महत्व
शुक्रवार, 13 नवंबर 2026नहाय-खायस्नान करके शुद्धता के साथ व्रत की शुरुआत
शनिवार, 14 नवंबर 2026खरनादिनभर व्रत और शाम को प्रसाद ग्रहण
रविवार, 15 नवंबर 2026संध्या अर्घ्यडूबते सूर्य को अर्घ्य देना
सोमवार, 16 नवंबर 2026उषा अर्घ्य और पारणउगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत समाप्त करना

छठ पूजा कैसे मनाते हैं? (How to Celebrate Chhath Puja?)

छठ पूजा भारत के प्रमुख लोक आस्था के त्योहारों में से एक है। यह महापर्व चार दिनों तक मनाया जाता है और इसमें साफ-सफाई, पवित्रता, उपवास तथा सूर्य देव की उपासना का विशेष महत्व होता है। छठ पूजा में व्रत रखने वाले व्यक्ति को व्रती कहा जाता है। इस दौरान व्रती कठिन नियमों का पालन करते हुए भगवान सूर्य और छठी मैया की पूजा करते हैं। छठ पूजा की शुरुआत नहाय-खाय से होती है, दूसरे दिन लोहंडा और खरना मनाया जाता है, तीसरे दिन डूबते सूर्य को संध्या अर्घ्य दिया जाता है और चौथे दिन उगते सूर्य को उषा अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है।

1. पहला दिन – नहाय-खाय (Nahay Khay)

छठ पूजा का पहला दिन नहाय-खाय कहलाता है। इस दिन व्रती सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और घर की साफ-सफाई करके पूजा की तैयारियां शुरू करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन शरीर और मन की शुद्धता का विशेष महत्व होता है।

नहाय-खाय के दिन व्रती सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। आमतौर पर भोजन में कद्दू की सब्जी, चने की दाल और अरवा चावल बनाए जाते हैं। भोजन तैयार करने में शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है। कई परिवारों में खाना मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से बनाया जाता है। इस दिन व्रती भोजन करने के बाद अगले दिन के निर्जला उपवास की तैयारी करते हैं।

2. दूसरा दिन – लोहंडा और खरना (Lohanda and Kharna)

छठ पूजा का दूसरा दिन लोहंडा और खरना कहलाता है। इस दिन व्रती सुबह स्नान करने के बाद पूरे दिन उपवास रखते हैं। इस दौरान वे भोजन और जल ग्रहण नहीं करते। शाम को सूर्यास्त के बाद भगवान सूर्य और छठी मैया की पूजा की जाती है तथा खरना का प्रसाद तैयार किया जाता है।

खरना के प्रसाद में मुख्य रूप से गुड़ की खीर, रोटी और केले का इस्तेमाल किया जाता है। कई जगहों पर खीर मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से बनाई जाती है। पूजा करने के बाद व्रती सबसे पहले प्रसाद ग्रहण करते हैं और फिर परिवार के अन्य सदस्यों तथा श्रद्धालुओं में प्रसाद बांटा जाता है।

खरना के बाद व्रती लगभग 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू करते हैं, जो चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने और पारण करने के बाद समाप्त होता है।

3. तीसरा दिन – संध्या अर्घ्य (Sandhya Arghya)

छठ पूजा का तीसरा दिन सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक माना जाता है। इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं और शाम को डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देने की तैयारी करते हैं। परिवार के सदस्य छठ पूजा का प्रसाद, फल, गन्ना, नारियल, ठेकुआ और अन्य पूजा सामग्री बांस की टोकरी या सूप में सजाते हैं।

शाम के समय व्रती परिवार के सदस्यों के साथ नदी, तालाब या अन्य जलाशयों के किनारे बने छठ घाट पर पहुंचते हैं। सूर्यास्त के समय पानी में खड़े होकर सूर्य देव को जल और दूध से अर्घ्य दिया जाता है। इस दौरान छठी मैया के पारंपरिक गीत गाए जाते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की लंबी आयु तथा अच्छे स्वास्थ्य की कामना की जाती है।

डूबते सूर्य को अर्घ्य देना छठ पूजा की एक विशेष परंपरा है, जो सूर्य देव के प्रति आभार और सम्मान प्रकट करती है।

4. चौथा दिन – उषा अर्घ्य और पारण (Usha Arghya and Paran)

छठ पूजा का चौथा और अंतिम दिन उषा अर्घ्य कहलाता है। इस दिन व्रती सुबह सूर्योदय से पहले ही परिवार के सदस्यों के साथ छठ घाट पर पहुंच जाते हैं। घाट पर पूजा की सभी सामग्री सजाई जाती है और सूर्य देव के उदय होने की प्रतीक्षा की जाती है।

सूर्योदय के समय व्रती जल में खड़े होकर उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इसके बाद छठी मैया और सूर्य देव की पूजा करके परिवार की सुख-शांति, संतान की लंबी आयु और समृद्धि की कामना की जाती है।

उषा अर्घ्य के बाद व्रती छठ पूजा का पारंपरिक प्रसाद ग्रहण करके अपना 36 घंटे का निर्जला व्रत समाप्त करते हैं। इसे पारण कहा जाता है। इसके बाद परिवार और आसपास के लोगों में ठेकुआ, फल तथा अन्य प्रसाद वितरित किया जाता है। इसी के साथ चार दिनों तक चलने वाला छठ महापर्व संपन्न हो जाता है।

छठ पूजा के चार दिनों का संक्षिप्त विवरण

दिनपूजा / परंपराप्रमुख गतिविधि
पहला दिननहाय-खायस्नान और सात्विक भोजन
दूसरा दिनलोहंडा और खरनाउपवास और खरना प्रसाद
तीसरा दिनसंध्या अर्घ्यडूबते सूर्य की पूजा
चौथा दिनउषा अर्घ्य और पारणउगते सूर्य की पूजा और व्रत समाप्ति

छठ पूजा की सामग्री (Chhath Puja Samagri List)

  • बांस का सूप और दउरा
  • ठेकुआ और गुड़
  • गेहूं का आटा और चावल
  • केला और नारियल
  • गन्ना और सिंघाड़ा
  • मूली और अदरक
  • दीपक, घी और अगरबत्ती
  • दूध और गंगाजल
  • पान, सुपारी और फूल

छठ पूजा के प्रमुख नियम और परंपराएं (Chhath Puja Rules and Traditions)

छठ पूजा को कठिन तपस्या, अनुशासन और पवित्रता का महापर्व माना जाता है। इस दौरान व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को कई विशेष नियमों और परंपराओं का पालन करना होता है। छठ पूजा में साफ-सफाई, शुद्ध भोजन, सात्विक विचार और पूजा सामग्री की पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है। इस पर्व में व्रती लगभग 36 घंटे तक निर्जला उपवास रखते हैं और भगवान सूर्य तथा छठी मैया की आराधना करते हैं। छठ पूजा की खास बात यह है कि इसमें किसी विशेष मंदिर या मूर्ति की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि प्रकृति के बीच सूर्य देव की उपासना की जाती है।

1. छठ पूजा में पवित्रता का महत्व

छठ पूजा में शारीरिक और मानसिक पवित्रता का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पर्व के दौरान व्रती को साफ-सफाई, सात्विक भोजन और शुद्ध विचारों का पालन करना चाहिए। छठ पूजा शुरू होने से पहले घर की अच्छी तरह सफाई की जाती है और पूजा के लिए इस्तेमाल होने वाले बर्तन, चूल्हे तथा अन्य सामान को साफ रखा जाता है।

छठ पूजा का प्रसाद तैयार करते समय विशेष सावधानी बरती जाती है। कई परिवारों में प्रसाद मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से बनाया जाता है। इस दौरान प्याज, लहसुन और तामसिक भोजन से परहेज किया जाता है। मान्यता है कि सच्चे मन, श्रद्धा और पवित्रता के साथ छठी मैया तथा सूर्य देव की पूजा करने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है।

2. छठ पूजा में 36 घंटे का निर्जला व्रत

छठ पूजा की सबसे कठिन और महत्वपूर्ण परंपराओं में से एक लगभग 36 घंटे का निर्जला व्रत है। यह व्रत खरना के दिन शाम को प्रसाद ग्रहण करने के बाद शुरू होता है और चौथे दिन सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद पारण के साथ समाप्त होता है।

इस दौरान व्रती अन्न और जल दोनों का सेवन नहीं करते। महिलाएं और पुरुष अपनी श्रद्धा के अनुसार यह कठिन उपवास रखते हैं और भगवान सूर्य तथा छठी मैया से परिवार की खुशहाली, संतान की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं।

हालांकि, यह जरूरी है कि निर्जला व्रत रखते समय अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य का ध्यान रखा जाए। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और किसी बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों को बिना चिकित्सकीय सलाह के इतना कठिन उपवास नहीं रखना चाहिए।

3. छठ पूजा में बांस के सूप और दउरा का महत्व

छठ पूजा में बांस से बने सूप और दउरा का विशेष महत्व होता है। सूप का इस्तेमाल पूजा सामग्री और प्रसाद रखने के लिए किया जाता है, जबकि दउरा एक बड़ी बांस की टोकरी होती है, जिसमें फल, नारियल, गन्ना, ठेकुआ और अन्य पूजा सामग्री रखकर छठ घाट तक ले जाई जाती है।

बांस को पारंपरिक रूप से पवित्रता, मजबूती और शुभता का प्रतीक माना जाता है। छठ पूजा में बांस के बने सामान का इस्तेमाल करना भारतीय ग्रामीण संस्कृति और प्रकृति से जुड़े रहने की परंपरा को भी दर्शाता है।

छठ पर्व के दौरान महिलाएं पारंपरिक सूप में पूजा की सामग्री सजाकर सूर्य देव को अर्घ्य देती हैं। इस परंपरा में परिवार के सभी सदस्य मिलकर पूजा की तैयारियों में हिस्सा लेते हैं।

4. छठ पूजा में ठेकुआ और पारंपरिक प्रसाद का महत्व

छठ पूजा में ठेकुआ सबसे प्रमुख और लोकप्रिय प्रसाद माना जाता है। इसे गेहूं के आटे, गुड़ या चीनी और घी से तैयार किया जाता है। कई परिवारों में ठेकुआ को पारंपरिक लकड़ी के सांचे से विशेष डिजाइन देकर बनाया जाता है।

ठेकुआ के अलावा छठ पूजा में केला, नारियल, गन्ना, सेब, संतरा, सिंघाड़ा, मूली और अन्य मौसमी फलों का भी प्रसाद चढ़ाया जाता है। खरना के दिन गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद बनाया जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार छठी मैया और सूर्य देव को शुद्ध एवं सात्विक प्रसाद अर्पित करने से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है। पूजा पूरी होने के बाद प्रसाद परिवार, रिश्तेदारों और आसपास के लोगों में बांटा जाता है। इस परंपरा के माध्यम से आपसी प्रेम, सहयोग और सामाजिक एकता का संदेश मिलता है।

छठ पूजा में डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य क्यों दिया जाता है? (Why Do We Offer Arghya to Setting and Rising Sun?)

छठ पूजा की सबसे अनोखी और महत्वपूर्ण परंपरा डूबते और उगते दोनों सूर्य को अर्घ्य देना है। आमतौर पर हिंदू धर्म में सुबह उगते सूर्य की पूजा की जाती है, लेकिन छठ महापर्व में डूबते सूर्य को भी समान श्रद्धा और सम्मान के साथ अर्घ्य अर्पित किया जाता है।

1. डूबते सूर्य को अर्घ्य देने का महत्व

छठ पूजा के तीसरे दिन शाम को व्रती जल में खड़े होकर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इसके पीछे धार्मिक मान्यता है कि सूर्य देव दिनभर संसार को प्रकाश और ऊर्जा प्रदान करते हैं। डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर श्रद्धालु उनके प्रति आभार और सम्मान व्यक्त करते हैं। यह परंपरा हमें जीवन के हर चरण और हर परिस्थिति का सम्मान करना सिखाती है।

2. उगते सूर्य को अर्घ्य देने का महत्व

छठ पूजा के चौथे दिन सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। उगते सूर्य को नई शुरुआत, आशा, सकारात्मकता और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालु सूर्य देव से परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और संतान के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं। उषा अर्घ्य के बाद ही छठ व्रत का पारण किया जाता है।

3. छठ पूजा में दोनों समय सूर्य की पूजा करने का संदेश

डूबते और उगते दोनों सूर्य की पूजा करने के पीछे एक सुंदर सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संदेश छिपा है। यह परंपरा सिखाती है कि हमें केवल सफलता और उन्नति के समय ही नहीं, बल्कि जीवन के कठिन और कमजोर दौर में भी सम्मान और कृतज्ञता बनाए रखनी चाहिए।

छठ पूजा हमें प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने, अनुशासन का पालन करने और परिवार तथा समाज के साथ मिलकर त्योहार मनाने की प्रेरणा देती है।

अपने परिजनों को छठ पूजा की शुभकामनायें भेजें

छठ महापर्व की अनुष्ठान और प्रथाएँ:

पवित्रता:

छठ पूजा के दौरान पवित्रता बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है। इसमें शरीर, मन और परिवेश की स्वच्छता शामिल है। छठ पर्व में शामिल सामग्री सभी प्रकृति प्रदत चीजों से बानी होती है।

छठ व्रत का उपवास:

छठ व्रती 36 घंटे तक बिना पानी के कठोर उपवास भक्ति का प्रतीक है और माना जाता है कि यह समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशी लाता है।

प्रार्थना और प्रसाद:

छठ व्रती पानी में खड़े होकर बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ सूर्य को प्रार्थना और अर्घ्य देते हैं।

छठ महापर्व की पूजा अपार आस्था और सामुदायिक जुड़ाव का समय है, जहां परिवार जश्न मनाने के लिए एक साथ एकत्रित होते हैं और पृथ्वी पर जीवन को बनाए रखने के लिए सूर्य देव को धन्यवाद देते हैं।

Chath Puja kab hai

वर्ष 2026 मे छठ पूजा की तारीख:

13 नवंबर2026 (शुक्रवार)नहाय-खायछठ व्रती पवित्र स्नान के बाद सात्विक भोजन (कद्दू-भात) ग्रहण कर छठ व्रत की शुरुआत करते हैं।
14 नवंबर 2026(शनिवार)खरनाखरना मे दिनभर का निर्जला व्रत रखा जाता है। शाम को गुड़-चावल की खीर का प्रसाद बनाकर बांटा जाता है।
15 नवंबर2026 (रविवार)संध्या अर्घ्यइस दिन नदी या तालाब के घाटों पर डूबते हुए सूर्य को पहला अर्घ्य दिया जाता है।
16 नवंबर 2026 (सोमवार)उषा अर्घ्य /सुबह का अर्ध्यउगते हुए सूर्य को दूसरा और अंतिम अर्घ्य दिया जाता है, जिसके बाद व्रत का पारण (समापन) होता है।

छठ पूजा की शुभकामनाएं और संदेश (Chhath Puja Wishes in Hindi)

छठ पूजा आस्था, भक्ति, पवित्रता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का महापर्व है। इस खास अवसर पर लोग अपने परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों को छठी मैया और सूर्य देव का आशीर्वाद प्राप्त करने की शुभकामनाएं देते हैं। अगर आप भी अपने प्रियजनों को छठ पूजा की शुभकामनाएं भेजना चाहते हैं, तो यहां कुछ सुंदर छठ पूजा संदेश दिए गए हैं।

छठ पूजा की 10 बेहतरीन शुभकामनाएं (Chhath Puja Wishes)

1. छठी मैया की कृपा आप और आपके परिवार पर हमेशा बनी रहे। आपके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली आए। छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं!

2. सूर्य देव की रोशनी आपके जीवन को खुशियों से भर दे और छठी मैया आपके परिवार को स्वस्थ एवं खुशहाल रखें। छठ महापर्व की शुभकामनाएं!

3. छठी मैया से यही प्रार्थना है कि आपके जीवन के सभी दुख दूर हों और घर-परिवार में सुख-समृद्धि का वास हो। जय छठी मैया!

4. उगते सूर्य की नई किरणें आपके जीवन में नई उम्मीदें और सफलता लेकर आएं। आपको और आपके परिवार को छठ पूजा की हार्दिक बधाई!

5. छठी मैया का आशीर्वाद आपके बच्चों पर हमेशा बना रहे और आपका परिवार खुशियों से भरा रहे। छठ महापर्व मंगलमय हो!

6. आस्था के इस पावन पर्व पर सूर्य देव आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और खुशहाली का संचार करें। छठ पूजा की ढेर सारी शुभकामनाएं!

7. घाटों पर गूंजें छठी मैया के मधुर गीत, आपके जीवन में खुशियों की हो बरसात। छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं!

8. सूर्य देव की कृपा से आपके जीवन में कभी अंधकार न आए और छठी मैया की कृपा से हर मनोकामना पूरी हो। जय छठी मैया!

9. श्रद्धा, विश्वास और भक्ति से मनाएं छठ का त्योहार। आपके घर में हमेशा प्रेम, शांति और समृद्धि बनी रहे।

10. छठी मैया आपके परिवार की रक्षा करें और सभी को सुखी, स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन प्रदान करें। छठ महापर्व की मंगलकामनाएं!

छठ पूजा के छोटे WhatsApp और Facebook Status

  • जय छठी मैया! छठ महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।
  • सूर्य देव की कृपा और छठी मैया का आशीर्वाद हमेशा बना रहे।
  • आस्था का महापर्व छठ आपके जीवन में खुशियां लेकर आए।
  • उगते सूर्य की तरह आपका जीवन भी हमेशा चमकता रहे।
  • छठी मैया सबकी मनोकामनाएं पूरी करें। जय छठी मैया!

छठ पूजा से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (Chhath Puja FAQs)

छठ पूजा को लेकर लोगों के मन में तारीख, व्रत, पूजा विधि, प्रसाद और धार्मिक मान्यताओं से जुड़े कई सवाल होते हैं। यहां छठ महापर्व से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण सवालों के जवाब दिए गए हैं।

1. छठ पूजा 2026 में कब मनाई जाएगी?

छठ पूजा 2026 में 15 नवंबर को मनाई जाएगी। हालांकि चार दिवसीय छठ महापर्व की शुरुआत 13 नवंबर 2026 को नहाय-खाय से होगी और इसका समापन 16 नवंबर को उषा अर्घ्य तथा पारण के साथ होगा।

2. छठ पूजा कितने दिनों तक चलती है?

छठ पूजा चार दिनों तक मनाई जाती है। इसके चार प्रमुख दिन नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य हैं।

3. छठ पूजा में किस भगवान की पूजा की जाती है?

छठ पूजा में मुख्य रूप से भगवान सूर्य और छठी मैया की पूजा की जाती है। सूर्य देव को ऊर्जा और जीवन का स्रोत माना जाता है, जबकि छठी मैया को संतान की रक्षा करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है।

4. छठ पूजा में 36 घंटे का व्रत क्यों रखा जाता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार छठ पूजा में लगभग 36 घंटे का निर्जला व्रत सूर्य देव और छठी मैया के प्रति श्रद्धा एवं समर्पण प्रकट करने के लिए रखा जाता है। यह व्रत खरना के बाद शुरू होता है और उषा अर्घ्य के बाद पारण करने पर समाप्त होता है।

5. छठ पूजा में डूबते सूर्य को अर्घ्य क्यों दिया जाता है?

छठ पूजा में डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर उनके प्रति आभार और सम्मान व्यक्त किया जाता है। यह परंपरा जीवन के प्रत्येक चरण का सम्मान करने और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का संदेश देती है।

6. छठ पूजा में उगते सूर्य को अर्घ्य क्यों दिया जाता है?

उगते सूर्य को नई ऊर्जा, आशा और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। छठ पूजा के चौथे दिन सुबह सूर्य देव को अर्घ्य देकर परिवार की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की जाती है।

7. छठ पूजा में कौन-कौन से प्रसाद चढ़ाए जाते हैं?

छठ पूजा में मुख्य रूप से ठेकुआ, केला, नारियल, गन्ना, सिंघाड़ा, मूली, अदरक, सेब और अन्य मौसमी फल चढ़ाए जाते हैं। खरना के दिन गुड़ की खीर और रोटी का विशेष प्रसाद बनाया जाता है।

8. छठ पूजा का सबसे प्रमुख प्रसाद कौन सा है?

ठेकुआ छठ पूजा का सबसे लोकप्रिय और प्रमुख पारंपरिक प्रसाद माना जाता है। इसे गेहूं के आटे, गुड़ या चीनी और घी से तैयार किया जाता है।

9. छठ पूजा सबसे ज्यादा कहां मनाई जाती है?

छठ पूजा मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है। इसके अलावा दिल्ली, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और भारत के अन्य राज्यों में भी श्रद्धालु इस पर्व को मनाते हैं।

10. क्या पुरुष भी छठ पूजा का व्रत रख सकते हैं?

हां, छठ पूजा का व्रत महिलाएं और पुरुष दोनों रख सकते हैं। इस पर्व में व्रत रखने के लिए लिंग का कोई प्रतिबंध नहीं है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार छठी मैया तथा सूर्य देव की उपासना करते हैं।

11. छठ पूजा में खरना क्या होता है?

खरना छठ पूजा का दूसरा दिन होता है। इस दिन व्रती पूरे दिन उपवास रखते हैं और शाम को गुड़ की खीर तथा रोटी का प्रसाद बनाकर पूजा करते हैं। खरना के प्रसाद को ग्रहण करने के बाद लगभग 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है।

12. छठ पूजा का समापन कैसे होता है?

छठ पूजा का समापन चौथे दिन सुबह उगते सूर्य को उषा अर्घ्य देने के बाद होता है। इसके बाद व्रती पारण करके अपना निर्जला उपवास समाप्त करते हैं और परिवार तथा अन्य लोगों में प्रसाद बांटते हैं।

Chhath Puja 2026 Date – महत्वपूर्ण तारीखें

छठ पूजा 2026 का चार दिवसीय कैलेंडर

तारीखदिनछठ पूजा का अनुष्ठान
13 नवंबर 2026शुक्रवारनहाय-खाय
14 नवंबर 2026शनिवारलोहंडा और खरना
15 नवंबर 2026रविवारसंध्या अर्घ्य
16 नवंबर 2026सोमवारउषा अर्घ्य और पारण

छठ पूजा 2026 में संध्या अर्घ्य कब दिया जाएगा?

15 नवंबर 2026 को सूर्यास्त के समय डूबते सूर्य को संध्या अर्घ्य दिया जाएगा।

छठ पूजा 2026 में उषा अर्घ्य कब दिया जाएगा?

16 नवंबर 2026 को सूर्योदय के समय उगते सूर्य को उषा अर्घ्य दिया जाएगा।

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